वाल्मीकि रामायण 7.102.2
इमौ कुमारौ सौमित्रे तव धर्मविशारदौ ।अङ्गदश्चन्द्रकेतुश्च राज्यार्थे दृढविक्रमौ॥
imau kumārau saumitre tava dharmaviśāradau |aṅgadaścandraketuśca rājyārthe dṛḍhavikramau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें