वाल्मीकि रामायण 7.103.7
सौमित्रिस्तु तथेत्युक्त्वा प्रावेशयत तं मुनिम् ।ज्वलन्तमेव तेजोभिः प्रदहन्तमिवांशुभिः॥
saumitristu tathetyuktvā prāveśayata taṃ munim |jvalantameva tejobhiḥ pradahantamivāṃśubhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें