वाल्मीकि रामायण 7.104.2
तवाहं पूर्वसद्भावे पुत्रः परपुरञ्जय ।मायासम्भावितो वीर कालः सर्वसमाहरः॥
tavāhaṃ pūrvasadbhāve putraḥ parapurañjaya |māyāsambhāvito vīra kālaḥ sarvasamāharaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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