वाल्मीकि रामायण 7.104.3
पितामहश्च भगवानाह लोकपतिः प्रभुः ।समयस्ते कृतः सौम्य लोकान्सम्परिरक्षितुम्॥
pitāmahaśca bhagavānāha lokapatiḥ prabhuḥ |samayaste kṛtaḥ saumya lokānsamparirakṣitum ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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