वाल्मीकि रामायण 7.104.4
सङ्क्षिप्य हि पुरा लोकान्मायया स्वयमेव हि ।महार्णवे शयानो ऽप्सु मां त्वं पूर्वमजीजनः॥
saṅkṣipya hi purā lokānmāyayā svayameva hi |mahārṇave śayāno 'psu māṃ tvaṃ pūrvamajījanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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