वाल्मीकि रामायण 7.107.2
अद्य राज्ये ऽभिषेक्ष्यामि भरतं धर्मवत्सलम् ।अयोध्यायाः पतिं वीरं ततो यास्याम्यहं वनम्॥
adya rājye 'bhiṣekṣyāmi bharataṃ dharmavatsalam |ayodhyāyāḥ patiṃ vīraṃ tato yāsyāmyahaṃ vanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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