वाल्मीकि रामायण 7.11.15
अदितिश्च दितिश्चैव भगिन्यौ सहिते हि ते ।भार्ये परमरूपिण्यौ कश्यपस्य प्रजापतेः॥
aditiśca ditiścaiva bhaginyau sahite hi te |bhārye paramarūpiṇyau kaśyapasya prajāpateḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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