वाल्मीकि रामायण 7.11.50
धनदेन परित्यक्तां सुविभक्तमहापथाम् ।आरुरोह स देवारिः स्वर्गं देवाधिपो यथा॥
dhanadena parityaktāṃ suvibhaktamahāpathām |āruroha sa devāriḥ svargaṃ devādhipo yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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