वाल्मीकि रामायण 7.110.26
गत्वा तु सरयूतोयं स्थावराणि चराणि च ।प्राप्य तत्तोयविक्लेदं देवलोकमुपागमन्॥
gatvā tu sarayūtoyaṃ sthāvarāṇi carāṇi ca |prāpya tattoyavikledaṃ devalokamupāgaman ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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