वाल्मीकि रामायण 7.111.2
ततः प्रतिष्ठितो विष्णुः स्वर्गलोके यथा पुरम् ।येन व्याप्तमिदं सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम्॥
tataḥ pratiṣṭhito viṣṇuḥ svargaloke yathā puram |yena vyāptamidaṃ sarvaṃ trailokyaṃ sacarācaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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