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वाल्मीकि रामायण 7.12.32
मातापित्रोर्महाहर्षं जनयन्रावणात्मजः॥
mātāpitrormahāharṣaṃ janayanrāvaṇātmajaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंमातापित्रोर्महाहर्षं जनयन्रावणात्मजः॥
mātāpitrormahāharṣaṃ janayanrāvaṇātmajaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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