वाल्मीकि रामायण 7.13.24
देव्या दिव्यप्रभावेण दग्धं सव्यं ममेक्षणम् ।रेणुध्वस्तमिव ज्योतिः पिङ्गुलत्वमुपागतम्॥
devyā divyaprabhāveṇa dagdhaṃ savyaṃ mamekṣaṇam |reṇudhvastamiva jyotiḥ piṅgulatvamupāgatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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