वाल्मीकि रामायण 7.13.25
ततो ऽहमन्यद्विस्तीर्णं गत्वा तस्य गिरेस्तटम् ।तूष्णीं वर्षशतान्यष्टौ समाधारं महाव्रतम्॥
tato 'hamanyadvistīrṇaṃ gatvā tasya girestaṭam |tūṣṇīṃ varṣaśatānyaṣṭau samādhāraṃ mahāvratam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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