वाल्मीकि रामायण 7.15.11
ततो गदां समाविध्य माणिभद्रेण राक्षसः ।धूम्राक्षस्ताडितो मूर्ध्नि विह्वलः स पपात ह॥
tato gadāṃ samāvidhya māṇibhadreṇa rākṣasaḥ |dhūmrākṣastāḍito mūrdhni vihvalaḥ sa papāta ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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