वाल्मीकि रामायण 7.15.32
ततो मायां प्रविष्टो ऽसौ राक्षसीं राक्षसेश्वरः ।रूपाणां शतसाहस्रं विनाशाय चकार च॥
tato māyāṃ praviṣṭo 'sau rākṣasīṃ rākṣaseśvaraḥ |rūpāṇāṃ śatasāhasraṃ vināśāya cakāra ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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