वाल्मीकि रामायण 7.15.8
क्रुद्धेन च तदा राजन्मारीचेन युयुत्सुना ।निमेषान्तरमात्रेण द्वे सहस्रे निपातिते॥
kruddhena ca tadā rājanmārīcena yuyutsunā |nimeṣāntaramātreṇa dve sahasre nipātite ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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