वाल्मीकि रामायण 7.16.10
निवर्तस्व दशग्रीव शैले क्रीडति शङ्करः ।सुपर्णनागयक्षाणां देवगन्धर्वरक्षसाम्॥
nivartasva daśagrīva śaile krīḍati śaṅkaraḥ |suparṇanāgayakṣāṇāṃ devagandharvarakṣasām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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