वाल्मीकि रामायण 7.16.19
ते तव प्रबलं दर्पमुत्सेधं च पृथग्विधम् ।व्यपनेष्यन्ति सम्भूय सहामात्यसुतस्य च॥
te tava prabalaṃ darpamutsedhaṃ ca pṛthagvidham |vyapaneṣyanti sambhūya sahāmātyasutasya ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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