वाल्मीकि रामायण 7.16.29
रक्षसा तेन रोषाच्च भुजानां पीडनात्तदा ।मुक्तो विरावः सहसा त्रैलोक्यं येन कम्पितम्॥
rakṣasā tena roṣācca bhujānāṃ pīḍanāttadā |mukto virāvaḥ sahasā trailokyaṃ yena kampitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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