वाल्मीकि रामायण 7.16.43
मानुषान्न गणे देव स्वल्पास्ते मम सम्मताः ।दीर्घमायुश्च मे प्राप्तं ब्रह्मणस्त्रिपुरान्तक॥
mānuṣānna gaṇe deva svalpāste mama sammatāḥ |dīrghamāyuśca me prāptaṃ brahmaṇastripurāntaka ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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