वाल्मीकि रामायण 7.17.23
कश्च तावदसौ यं त्वं विष्णुरित्यभिभाषसे ।वीर्येण तपसा चैव भोगेन च बलेन च ॥
kaśca tāvadasau yaṃ tvaṃ viṣṇurityabhibhāṣase |vīryeṇa tapasā caiva bhogena ca balena ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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