वाल्मीकि रामायण 7.17.36
कन्यां कमलगर्भाभां प्रगृह्य स्वगृहं ययौ ।प्रगृह्य रावणस्त्वेतां दर्शयामास मन्त्रिणे॥
kanyāṃ kamalagarbhābhāṃ pragṛhya svagṛhaṃ yayau |pragṛhya rāvaṇastvetāṃ darśayāmāsa mantriṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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