वाल्मीकि रामायण 7.17.40
पूर्वं क्रोधाहितः शत्रुर्यया ऽसौ निहतस्तथा ।उपाश्रयित्वा शैलभस्तव वीर्यममानुषम्॥
pūrvaṃ krodhāhitaḥ śatruryayā 'sau nihatastathā |upāśrayitvā śailabhastava vīryamamānuṣam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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