वाल्मीकि रामायण 7.18.10
त्रिषु लोकेषु को ऽन्यो ऽस्ति यो न जानाति मे बलम् ।भ्रातरं येन निर्जित्य विमानमिदमाहृतम् ।ततो मरुत्तः स नृपस्तं रावणमथाब्रवीत्॥
triṣu lokeṣu ko 'nyo 'sti yo na jānāti me balam |bhrātaraṃ yena nirjitya vimānamidamāhṛtam |tato maruttaḥ sa nṛpastaṃ rāvaṇamathābravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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