वाल्मीकि रामायण 7.18.20
ततस्तं निर्जितं मत्वा घोषयामास वै शुकः ।रावणो जयतीत्युच्चैर्हर्षान्नादं विमुक्तवान्॥
tatastaṃ nirjitaṃ matvā ghoṣayāmāsa vai śukaḥ |rāvaṇo jayatītyuccairharṣānnādaṃ vimuktavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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