वाल्मीकि रामायण 7.18.7
तं च राजानमासाद्य रावणो राक्षसाधिपः ।प्राह युद्धं प्रयच्छेति निर्जितो ऽस्मीति वा वद॥
taṃ ca rājānamāsādya rāvaṇo rākṣasādhipaḥ |prāha yuddhaṃ prayaccheti nirjito 'smīti vā vada ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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