वाल्मीकि रामायण 7.19.16
सो ऽपश्यत्तन्नरेन्द्रस्तु नश्यमानं महाबलम् ।महार्णवं समासाद्य वनापगशतं यथा॥
so 'paśyattannarendrastu naśyamānaṃ mahābalam |mahārṇavaṃ samāsādya vanāpagaśataṃ yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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