वाल्मीकि रामायण 7.19.2
समासाद्य तु राजेन्द्रान्महेन्द्रवरुणोपमान् ।अब्रवीद्राक्षसेन्द्रस्तु युद्धं मे दीयतामिति॥
samāsādya tu rājendrānmahendravaruṇopamān |abravīdrākṣasendrastu yuddhaṃ me dīyatāmiti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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