वाल्मीकि रामायण 7.19.32
ततः स राजा राजेन्द्र गतः स्थानं त्रिविष्टपम् ।स्वर्गते च नृपे तस्मिन्राक्षसः सो ऽपसर्पत॥
tataḥ sa rājā rājendra gataḥ sthānaṃ triviṣṭapam |svargate ca nṛpe tasminrākṣasaḥ so 'pasarpata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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