वाल्मीकि रामायण 7.19.4
दुष्यन्तः सुरथो गाधिर्गयो राजा पुरूरवाः ।एते सर्वे ऽब्रुवंस्तात निर्जिताः स्मेति पार्थिवाः॥
duṣyantaḥ suratho gādhirgayo rājā purūravāḥ |ete sarve 'bruvaṃstāta nirjitāḥ smeti pārthivāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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