वाल्मीकि रामायण 7.19.7
प्राह राजानमासाद्य युद्धं देहीति रावणः ।निर्जितो ऽस्मीति वा ब्रूहि त्वमेवं मम शासनम्॥
prāha rājānamāsādya yuddhaṃ dehīti rāvaṇaḥ |nirjito 'smīti vā brūhi tvamevaṃ mama śāsanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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