वाल्मीकि रामायण 7.2.32
तस्मात्स विश्रवा नाम भविष्यति न संशयः ।एवमुक्ता तु सा देवी प्रहृष्टेनान्तरात्मना॥
tasmātsa viśravā nāma bhaviṣyati na saṃśayaḥ |evamuktā tu sā devī prahṛṣṭenāntarātmanā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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