वाल्मीकि रामायण 7.2.4
पुरा कृतयुगे राम प्रजापतिसुतः प्रभुः ।पुलस्त्यो नाम ब्रह्मर्षिः साक्षादिव पितामहः॥
purā kṛtayuge rāma prajāpatisutaḥ prabhuḥ |pulastyo nāma brahmarṣiḥ sākṣādiva pitāmahaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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