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वाल्मीकि रामायण 7.20.32
विमर्दं द्रष्टुमनयोर्यमराक्षसयोः स्वयम्॥
vimardaṃ draṣṭumanayoryamarākṣasayoḥ svayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंविमर्दं द्रष्टुमनयोर्यमराक्षसयोः स्वयम्॥
vimardaṃ draṣṭumanayoryamarākṣasayoḥ svayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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