वाल्मीकि रामायण 7.23.16
ततोपधार्य मायानां शतमेकं समाप्तवान् ।सलिलेन्द्रपुरान्वेषी भ्रमति स्म रसातलम्॥
tatopadhārya māyānāṃ śatamekaṃ samāptavān |salilendrapurānveṣī bhramati sma rasātalam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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