वाल्मीकि रामायण 7.23.23
यं समाश्रित्य जीवन्ति फेनपाः परमर्षयः ।अमृतं यत्र चोत्पन्नं स्वधा च स्वधभोजिनाम्॥
yaṃ samāśritya jīvanti phenapāḥ paramarṣayaḥ |amṛtaṃ yatra cotpannaṃ svadhā ca svadhabhojinām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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