वाल्मीकि रामायण 7.23.32
समीक्ष्य स्वबलं सङ्ख्ये वरुणस्य सुतास्तदा ।अर्दिताः शरजालेन निवृत्ता रणकर्मणः॥
samīkṣya svabalaṃ saṅkhye varuṇasya sutāstadā |arditāḥ śarajālena nivṛttā raṇakarmaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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