वाल्मीकि रामायण 7.24.17
अहो धिङ्मानुषं लोकं नास्ति खल्वधमः परः ।यद्दुर्बला बलवता भर्तारो रावणेन नः॥
aho dhiṅmānuṣaṃ lokaṃ nāsti khalvadhamaḥ paraḥ |yaddurbalā balavatā bhartāro rāvaṇena naḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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