वाल्मीकि रामायण 7.24.27
एते राजंस्त्वया वीरा दैत्या विनिहता रणे ।कालकेया इति ख्याताः सहस्राणि चतुर्दश॥
ete rājaṃstvayā vīrā daityā vinihatā raṇe |kālakeyā iti khyātāḥ sahasrāṇi caturdaśa ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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