वाल्मीकि रामायण 7.24.32
अलं वत्से रुदित्वा ते न भेतव्यं च सर्वशः ।दानमानप्रसादैस्त्वां तोषयिष्यामि यत्नतः॥
alaṃ vatse ruditvā te na bhetavyaṃ ca sarvaśaḥ |dānamānaprasādaistvāṃ toṣayiṣyāmi yatnataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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