वाल्मीकि रामायण 7.24.41
स तैः परिवृतस्सर्वै राक्षसैर्घोरदर्शनैः ।आगच्छत खरः शीघ्रं दण्डकानकुतोभयः॥
sa taiḥ parivṛtassarvai rākṣasairghoradarśanaiḥ |āgacchata kharaḥ śīghraṃ daṇḍakānakutobhayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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