वाल्मीकि रामायण 7.25.13
एतान्सर्वान्वरांल्लब्ध्वा पुत्रस्ते ऽयं दशानन ।अद्य यज्ञसमाप्तौ च त्वां दिदृक्षुस्स्थितो ह्यहम्॥
etānsarvānvarāṃllabdhvā putraste 'yaṃ daśānana |adya yajñasamāptau ca tvāṃ didṛkṣussthito hyaham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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