वाल्मीकि रामायण 7.25.32
अद्य तं समरे हत्वा मधुं रावणनिर्भयम् ।सुरलोकं गमिष्यामि युद्धकाङ्क्षी सुहृद्वृतः॥
adya taṃ samare hatvā madhuṃ rāvaṇanirbhayam |suralokaṃ gamiṣyāmi yuddhakāṅkṣī suhṛdvṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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