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वाल्मीकि रामायण 7.25.39
सा च प्रह्वाञ्जलिर्भूत्वा शिरसा चरणौ गता॥
sā ca prahvāñjalirbhūtvā śirasā caraṇau gatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंसा च प्रह्वाञ्जलिर्भूत्वा शिरसा चरणौ गता॥
sā ca prahvāñjalirbhūtvā śirasā caraṇau gatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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