वाल्मीकि रामायण 7.25.7
अहमाख्यामि ते राजञ्छ्रूयतां सर्वमेव तत् ।यज्ञास्ते सप्त पुत्रेण प्राप्तास्सुबहुविस्तराः॥
ahamākhyāmi te rājañchrūyatāṃ sarvameva tat |yajñāste sapta putreṇa prāptāssubahuvistarāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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