वाल्मीकि रामायण 7.27.26
ततो युद्धं समभवेद्देवदानवरक्षसाम् ।घोरं तुमुलनिर्ह्रादं नानाप्रहरणोद्यतम्॥
tato yuddhaṃ samabhaveddevadānavarakṣasām |ghoraṃ tumulanirhrādaṃ nānāpraharaṇodyatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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