वाल्मीकि रामायण 7.27.31
महाकायो ऽतिकायश्च देवान्तकनरान्तकौ ।एतैः सर्वैः परिवृतो महावीर्यो महाबलः॥
mahākāyo 'tikāyaśca devāntakanarāntakau |etaiḥ sarvaiḥ parivṛto mahāvīryo mahābalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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