वाल्मीकि रामायण 7.27.35
तथा ऽ ऽदित्यौ महावीर्यौ त्वष्टा पूषा च दंशितौ ।निंर्भयौ सह सैन्येन तदा प्राविशतां रणे॥
tathā ' 'dityau mahāvīryau tvaṣṭā pūṣā ca daṃśitau |niṃrbhayau saha sainyena tadā prāviśatāṃ raṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें