वाल्मीकि रामायण 7.27.47
ततः प्रगृह्य दीप्ताग्रां कालदण्डोपमां गदाम् ।तां मूर्ध्नि पातयामास सावित्रो वै सुमालिनः॥
tataḥ pragṛhya dīptāgrāṃ kāladaṇḍopamāṃ gadām |tāṃ mūrdhni pātayāmāsa sāvitro vai sumālinaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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