वाल्मीकि रामायण 7.27.49
तस्य नैवास्थि न शिरो न मांसं ददृशे तदा ।गदया भस्मतां नीतं निहतस्य रणाजिरे॥
tasya naivāsthi na śiro na māṃsaṃ dadṛśe tadā |gadayā bhasmatāṃ nītaṃ nihatasya raṇājire ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें